चंडीगढ़: चंडीगढ़ में “गुग्गा माड़ी हनुमान मंदिर” विराजमान है. इस मंदिर के इतिहास की बात करें तो ये मंदिर 400 -500 साल पुराना है. ये मंदिर चंडीगढ़ शहर के बसने से पहले से यहां मौजूद है. चंडीगढ़ बसने से पहले आस-पास के गांव के लोग यहां मत्था टेकने आते थे.
सेक्टर 20 में बसा है गांव: ये मंदिर चंडीगढ़ बसने से पहले कैसे बना और इस मंदिर का इतिहास क्या है? इस बारे में अधिक जानकारी के लिए ईटीवी भारत की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर 20 पहुंची जहां यह मंदिर है. यहां रह रहे लोगों का कहना है कि चंडीगढ़ को बसाए जाने से पहले एक खेड़ी नाम का गांव था. गांव की जमीन पर एक छोटा मंदिर हुआ करता था. लेकिन जब चंडीगढ़ बसाया गया तो पहले से मौजूद कई गांवों की तरह गांव खेड़ी को भी नक्शे में शामिल कर लिया गया. ग्रामीणों को उस समय उनकी जमीन के अनुसार धनराशि दी गई और शहर को बसा लिया गया.
अब तक मंदिर में रहे पांच मुख्य पुजारी:मौजूदा समय में “श्री गुग्गा माड़ी हनुमान मंदिर” में बतौर मुख्य पुजारी जिला मोहाली के जीरकपुर में रहने वाले किशोरी लाल सेवाएं दे रहे हैं. किशोरी लाल ने ईटीवी भारत को बताया कि वो मूल रूप से देहरादून के रहने वाले हैं. पहले वो हरिद्वार में रहते थे. कभी गांव खेड़ी के नाम से जाने गए इस क्षेत्र के सेक्टर 20 का रूप लेने के बाद आज तक यहां मंदिर में चार अन्य पुजारी भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इन पुजारियों में ब्रह्मानंद (उत्तराखंड), लाडली लाल (हरियाणा), भवानंद विशिष्ट (गढ़वाल), भास्करानंद (गढ़वाल) और वर्तमान में किशोरी लाल मुख्य पुजारी एवं कमेटी के चेयरमैन हैं.
इस परिवार के नाम पर थी जगह: मंदिर की ये जमीन किसी प्रभु नाम के व्यक्ति के नाम हुआ करती थी. इस बारे में मंदिर के मुख्य पुजारी किशोरी लाल बताते हैं कि जब गांव खेड़ी हुआ करता था, उस दौरान मंदिर की यह जमीन प्रभु नाम के व्यक्ति के नाम पर हुआ करती थी. वो तरखाने थे, जिनकी ये जमीन थी. प्रभु के तीन बेटे हुए. फिर आगे उनका परिवार भी बढ़ा, जो वर्तमान में जीरकपुर और लालड़ू में बसे हुए हैं. प्रभु के परिवार के एक सदस्य लालड़ू के रहने वाले राजकुमार अभी भी मंदिर में आते हैं. हालांकि उन्होंने भी कभी ये दावा नहीं किया है कि ये उनकी जमीन है. जब चंडीगढ़ बसा तो वे जो सरकार की ओर से दी गई धनराशि लेकर चले गए.
श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर प्रबंधन को मजबूती मिली: पंडित किशोरी लाल ने बताया कि उन्होंने मंदिर में बतौर पुजारी वर्ष 1979 में सेवा संभाली. उस दौरान मंदिर काफी छोटा होता था, जिसके संचालन के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर प्रबंधन को मजबूती मिलती गई. इस मंदिर में मां वैष्णो देवी, काली माता, सीताराम परिवार, राधाकृष्ण, बाबा बालक नाथ, गुग्गा महाराज, गणपति, लक्ष्मी नारायण, बगलामुखी और नवग्रह मंदिर स्थापित है. इनके साथ ही यहां शिवालय भी स्थापित है.
साल में होते 50 से अधिक भंडारे: मंदिर में साल में 50 से अधिक भंडारे लगते हैं. ये भंडारा मंदिर ट्रस्ट के साथ ही श्रद्धालुओं के सहयोग से होता है. इसके अलावा मंदिर में मिलने वाले दान से यहां गरीब बेटियों का विवाह कराया जाता है. हर साल यहां सामूहिक विवाह का आयोजन भक्तों के सहयोग से होता है.
5100 बेल पत्तों से शिवजी का श्रृंगार: मंदिर के मुख्य पुजारी किशोरी लाल बताते हैं कि प्रत्येक साल सावन के महीने में मंदिर में स्थापित शिवालय का रोजाना सुबह 5100 बेल के ताजा पत्तों से, फूल-फलों से श्रृंगार किया जाता है. शाम के समय सभी पत्तों को हटाने के बाद अगले दिन दोबारा ताजा पत्तों से फिर से शिवजी का श्रृंगार किया जाता है. मंदिर में जन्माष्टमी से एक दिन पहले गुग्गा माड़ी का मेला शुरू होता है, जो जन्माष्टमी के अगले दिन गुग्गा नवमी पर संपन्न होता है. नवमी पर मंदिर में हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
सालों से 32 फीट हनुमानजी की भव्य प्रतिमा विराजमान: मंदिर में हनुमान जी की 32 फीट ऊंची प्रतिमा है, जिसका निर्माण साल 1999-2000 में कराया गया. इस बारे में मंदिर के मुख्य पुजारी किशोरी लाल बताते हैं कि इस मूर्ति के निर्माण के लिए श्रद्धालुओं ने सहयोग राशि दी. जिसके कारण आज यह प्रतिमा तैयार हो सकी. मंदिर में स्थापित श्री हनुमान जी की यह मूर्ति हर किसी को मंत्रमुग्ध करने वाली है.
मंदिर में संस्कृत विद्यालय भी मौजूद: इस मंदिर में चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालय भी मौजूद है, जहां से हर साल कई छात्र बीएड और शास्त्री करते हैं. हालांकि इन छात्रों की परीक्षा पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित की जाती है, जहां से वे डिग्री हासिल करते हैं. मंदिर परिसर में ही छात्रावास भी है, जहां छात्रों के खानपान और ठहरने की व्यवस्था की गई है.
आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी और जिम भी संचालित: सुचारू संचालन के लिए मंदिर की कमेटी भी है, जिसके चेयरमैन मुख्य पुजारी किशोरी लाल हैं. इसके अलावा मंदिर में पाठ-पूजा और हवन सहित छात्रों को शिक्षित करने के लिए अध्यापक और अन्य प्रबंधों के लिए कर्मचारी भी रखे गए हैं. इनमें कुल आठ अध्यापक, छह पुजारी, एक मुख्य पुजारी, चार सेवादार, एक कुक, एक चपरासी और एक सफाई कर्मचारी है. आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों के लिए मंदिर में एक आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी भी स्थापित है, जहां चंडीगढ़ के ही धनवंतरी आयुर्वेदिक कॉलेज से सेवानिवृत डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.इसके अलावा यहां जिम भी संचालित है, जहां युवा वर्ग सहित अन्य हर दिन सुबह जिम करने आते हैं.